Friday, December 2, 2011

माँ जैसा दुनिया में है कोई कहाँ............

थक जाते है बहुत काम करते करते,

माँ तू होती तो एक कप चाय बनाने को कह देते |


अब नहीं सुहाता स्वाद इन पकवानों का,

माँ तू होती तो तेरे हाथो से लजीज दाल रोटी खा लेते |


नरम बिस्तरों पर भी नींद नही आती अब तो,

माँ तू होती तो लोरी सुनते सुनते तेरी गोद में सिर रखकर सो लेते |


कड़ी धूप हो या बारिश कोई परवाह करने वाला नहीं,

माँ तू होती तो तेरी ममता की छाँव में हर मौसम सह लेते |


इन रेशमी कपड़ो में वो अपनेपन का एहसास कहाँ,

माँ तू होती तो हाथो से बुना स्वेटर पहन इठलाकर चल देते |


करवटे बदलते हुए जाने कब रात कट जाती है,

माँ तू होती तो तेरे किस्से कहानियो में अपना बचपन संजो लेते |


झूठी हंसी हंसकर अपना गम छुपाने की कोशिश करते है,

माँ तू होती तो तेरे आँचल में सिर छुपाकर थोडा रो लेते |


दुनिया की भाग दौड़ में जीने तक की फुर्सत नहीं मिली,

माँ तू होती तो तेरे कदमो तले घडी भर चैन से जी लेते |


खुशियों की तलाश में बहुत आगे निकल गए,

माँ तू होती तो तेरे प्यार के सागर से दो बूंद हम भी पी लेते|

dis poem is not originally written by me. I have made some modifications only.