Friday, June 27, 2014

No papa no life..

खोकर आपको जाना कि आप कितने ख़ास थे..
महफूज़ थी मैं जब आप मेरे आस पास थे..

ऊँचाइयो को छूने का हौसला था मन में..
मेरे मन का तो आप ही आत्मविश्वास थे..

सुलझ जाती थी हर मुश्किल मेरी..
उसमे भी छिपे आप ही के प्रयास थे..

महसूस किया है मैंने अकेले उड़ने का दर्द..
मेरे नन्हे पंखो की आप ही परवाज़ थे..

अन्धकार क्या होता है अब जाना है मैंने..
मेरे लिए तो आप तारों भरा आकाश थे..

खामोश सी लगती है जिंदगी अब मेरी..
आप तो मेरे अंतर की छुपी हुई आवाज़ थे..

बेजान सी जी रही हूँ जिंदगी आपके बिना..
आप ही मेरा दिल.. मेरी धड़कन.. मेरी श्वास थे..

जाने क्यों....

जाने क्यों ये अपने मुझसे रूठ जाते है...
पिरोती हूँ माला पर मोती टूट जाते है..
जाने क्यों...

साए की तरह रहते थे हरदम हमारे पास..
वो हमसाया बनकर भी हमसे दूर जाते है..
जाने क्यों...

जो जिन्दगी भर साथ निभाने का वादा करते थे...
वो अब यादो में भी नजर आने से कतराते है...
जाने क्यों...

जिनके अपनेपन ने हमें जिंदगी की कीमत सिखाई..
वो अब बेगाने बनकर हमारी खुशियाँ लूट जाते है..
जाने क्यों....

मेरे चेहरे में छुपा है........

मेरी सूरत में मैं आपकी सूरत ढूंढती हूँ...
काश कही दिख जाये आपकी सी वो मूरत ढूंढती हूँ...

मन को विश्वास है किसी पल तो आप मिलोगे...
अब तो मैं लम्हा वो ख़ूबसूरत ढूंढती हूँ...

आपके बिना बस गुमनाम सी है जिंदगी...
अब तो मैं अपने जीने की जरुरत ढूंढती हूँ..

आपके बिना जीना भी क्या जीना है..
मैं तो अब अपनी मौत का मुहूरत ढूंढती हूँ..

Miss u a lot papa.. aap toh aise naa the..

हाल-ए-दिल

हवाओ में जाने क्यों एक खुशबू सी छाए है...
बहारे भी आज कुछ ज्यादा ही सकुचाये है...

झुकी हुई पलकों से हुए दीदार का क्या कहना..
कि नज़रे उठती ही नही परेशां से हम सिर झुकाए है...

जाने क्या ढूंढ रही थी उनकी वो एकटक निगाहें...
क्या पता था उन्हें कि हम मन ही मन घबराये है...

अब तो आलम कुछ ऐसा था दोस्तों..
कि बिना पिए हमने सारे होश गँवाए है..

दुआ मांगते है ठहर जाये ये पल यूँ ही..
बड़े दिनों बाद हम इतना शर्माए है...

Friday, June 13, 2014

इन राहों की दूरियाँ...........

आज तक वो कभी हमारे पास ना थे…
मन में फिर भी दूरियों के एहसास ना थे…
आज चले गए है मीलो दूर हमसे वो....
कैसे कहे कभी इतने ग़मगीन हालात ना थे....

आये थे अजनबी बनकर हमारी ज़िंदगी  वो....
अब तो उनके बिना ज़िंदगी अजनबी हो गयी.…
वो लाये थे अपने साथ खुशियाँ हज़ारों .....
जाने से उनके हमारी हर ख़ुशी खो गयी....

मेरी माँ... प्यारी माँ...

"जब जब मैंने खुद को किसी परेशानी में पाया है
तब तब माँ ने ही मेरा साथ निभायाहै।

कभी एक गुरु कभी एक दोस्त
तो कभी माँ मेरा साया है।

आज जब इश्वर को याद करके आँखे बंद की तो
माँ का चेहरा ही नज़रों के सामने पाया है। 

माँ के इतने रूप देखकर
 एक विचार मन में आया है।

नही जा सकता भगवान् हर किसी के पास
इसीलिए तो उसने माँ को बनाया है। 

है चारों धामों कि पवित्रता माँ के चरणों मे क्योंकि
माँ के जरिये ही इश्वर ने अपने होने का एहसास कराया है। 

माँ को ठुकरा कर दौलत के पीछे मत भागो
माँ के आँचल में तो अनमोल खजाना समाया है।

माँ कि आँखों में आंसू देने वाले इतना जरुर सोचना
तुने खुद ब खुद स्वर्ग का मार्ग ठुकराया है। 

Wednesday, June 11, 2014

अब मैंने जीना सीख लिया है....

अब मैंने जीना सीख लिया है...

खोया हुआ तो हमेशा मिलता था..
अब मैंने पाकर खोना सीख लिया है...

हँसते हुए कई बार आँखों में पानी आता था..
अब मैंने भरी आँखों में मुस्कुराना सीख लिया है...

छोटी सी चोट से दिल ज़ार ज़ार हो जाता था..
मैंने हंसी में दर्द को पीना सिख लिया है...

महफिलो का सब करते है इंतज़ार शिद्दत से..
पर मैंने सूनेपन को अपनाना सीख लिया है....

पहले आपकी बाते करते जुबाँ नहीं थकती थी..
अब ज़िक्र होने पर भी मैंने जुबाँ को सीना सीख लिया है...

तेरा साथ है तो.....

जिंदगी के ताने बाने में कुछ ख्वाब यूँ बुनो..
कुछ अपने मन की कहो कुछ मेरे दिल की सुनो
मंजिल तो मिल ही जाएगी राहों पे चलते चलते..
हाथ थामकर मेरा कुछ दूर यूँ ही संग चलो।
जीवन की इस बगिया में फूल है और कांटे भी..
काँटों से ना घबराओ फूल सारे तुम चुनो।
प्यार पूजा प्यार मंदिर प्यार जिंदगी का फलसफा है..
प्यार के ये ढाई अक्षर कुछ मैं पढू कुछ तुम पढ़ो।
तूफानों के बीच में एक टूटी सी किश्ती हूँ मैं..
पतवार बनकर मेरी उस पार को तुम बढ़ो।
मन में मेरे एक अथाह खजाना छुपाया है..
बनकर इस मानस के हंस मोती इसके तुम चुनो।
हो जाए अटूट ये रिश्ता तोड़े से भी ना टूटे..
इसी आस के साथ मैं तुम्हारी बनू तुम मेरे बनो। 

इज़हार-ए-इश्क

जब से मिली है मेरी नज़र से उनकी नज़र...
ना शामो का ठिकाना है ना रातो की है खबर..
जब भी खोलते है लब आ जाता है उनका ज़िकर..
ना खुद का होश है ना ज़माने की है फ़िकर..
मुझ पर है उनकी चाहत का कुछ ऐसा ये असर...
उनके साथ से मेरी शब है उनके साथ ही सेहर...
चाहते है दिल की गहराइयों से उनको मगर...
खो ना दे पाकर उनको इसी बात का है डर...
उनसे हो मंजिल मेरी उनसे ही हो सफ़र...
हर जनम में मिले मुझे बस वो ही हमसफ़र...
दुआ है खुदा से ना दिखाए कभी जुदाई का मंजर...
हो जाये अटूट ये रिश्ता कर दे कुछ ऐसी मेहर...

तारिफ़ करूँ क्या उसकी...

मेरा यार दुनिया से जुदा सा है ...
हर अंदाज़ उसका अलहदा सा है...

रातों में चमके है जुगनू सा चमचम..
वो शबनम से भीगी सुबह सा है...

बसे है जो खुशबू फिज़ाओ में ऐसी...
वो बारिश की सौंधी हवा सा है...

है फूलों सी शोखी चेहरे पे उसके..
आँखों में मदमस्त इक नशा सा है...

गुलशन है उसकी हँसी से ये आलम...
इक परिंदा जो आँगन में चहका सा है...

बातों में उसके है झरनों सा गुंजन...
वो बच्चों की सी मासूम अदा सा है...

है निर्मल वो जैसे हो बादल में चन्दा..
वो सजदे में मिलती दुआ सा है...

सपनों में आकर यूँ नींदे चुराना...
फ़साना अभी ये कुछ ताज़ा सा है...

ये दिल भी यूँ धडके है जोरों से ऐसे..
मेरा मन भी उन पर फ़िदा सा है...

गुनगुनाने लगे है जो सरगम पे उनकी..
लगे कोई नगमा सुहाना सा है...

यूँ नज़रे उठाना यूँ नज़रे झुकाना..
ये नज़रों की चोरी इक सज़ा सा है...

हैं बदले से अंदाज़ मेरे भी ऐसे...
ना मालूम मुझे आज हुआ क्या है...

डर लगता है कोई यूँ पूछ ना बैठे..
कि मेरी मुस्कराहट की वज़ह क्या है....

Thursday, June 5, 2014

बातों ही बातों में.....

वो कहते है कि हमारी बातों  में नशा हैं....
हम कहते हैं नशा नहीं ये दीवानेपन की दशा है…

वो कहते है क्या नाज़ है क्या हमारी अदा है…
हम कहते है की इसीलिए तो हम औरो से जुदा  है....

वो कहते है हमारी ख़ामोशी उनके लिए  सज़ा  हैं.....
हम कहते है सुनो ख़ामोशी का गीत इसमें भी बड़ा मजा है..

वो कहते है जबसे देखा है हमे दिन का ख्याल ना रातो का पता है..
हम कहते है नहीं ये हमारा कसूर ये आपके नज़रों की खता है...

वो कहते है दूर है उनसे क्यों हम क्यों उनसे खफा है..
हम कहते है दूर होकर भी दिल के करीब है यही तो सच्ची वफ़ा है..

वो कहते है कि हमारी नजरो ने उन पर वार किया है...
हम नज़रे झुकाकर कहते है इक आप ही से तो इन्होने सच्चा प्यार किया है..

वो कहते है हमारी इन्ही बातों पर वो फ़िदा है...
हम कहते है एक आप ही के लिए तो हम इस जहाँ में जिंदा है...

कुछ ख़याल ......

जब दूर थे हम तो वो हमारी तस्वीरों से बात किया करते थे
हमारे करीब होने का एहसास किया करते थे.…
आज हमारी और  देखने की फुर्सत नहीं उन्हें
कभी हमारी सिर्फ़ एक झलक पाने की फ़रियाद  किया करते थे.…

हमारी मौजूदगी अब उन्हें गंवारा  है..
अब उनका साहिल कहीं और हमारा किनारा कहीं  है..
पहले तो कहते थे की अपना हमसफ़र हमें वो..
आज हमसे भी ज्यादा उन्हें प्यारा कोई है..

हम तो उनके इंतज़ार में पलके बिछाये बैठे थे..
अपनी आँखों में उनकी चाहत के सपने सजाये बैठे थे...
सोचा नही था हमने वो निकलेंगे ऐसे बेवफ़ा...
हमारी अरमानों की चिता ऊपर नई महफ़िल जमाये बैठे थे...

अरमानों को भुला दिया और सपनों से मुँह मोड़ लिया
उनकी ख़ुशी के खातिर हमने उनसे रिश्ता तोड़ लिया
बस एक ही सवाल करता है मन ये मेरा मुझसे ...
मुझे क्यों तनहा यूँ बीच राह में छोड़ दिया…