Thursday, April 25, 2013

नवीन के जन्मदिन पर वर्तिका की तरफ से एक तुच्छ भेंट

एक धोखेबाज दोस्त (श्रीमान नवीन खण्डेलवाल ) की कहानी ;
एक भोली भाली लड़की (सुश्री वर्तिका बाफना ) की जुबानी....

नवीन ने दी अपने 5 फ्रेन्ड्स को पार्टी होटल श्री में
भुला दिया मुझे सोचा कि टरका देगा मुझे तो वो फ्री में

स्टार्टर में मंगवाया टोमेटो सूप और पापड में डलवाया मसाला
पनीर टिक्के के साथ वेज कबाब चट कर गया अकेला साला

मैन कौर्स में टेबल पर आया दाल तड़का, गार्लिक नान और सलाद ओनियन वाला
खाते टाइम कैसे भूल गया था कि मुझसे पड़ने वाला है तेरा पाला 

इतने में भी भूख नहीं मिटी जो आर्डर किया कढ़ाही पनीर और मलाई कोफ्ता
थोड़ी और भूख बचा कर रखना क्योंकि अब खाना पड़ेगा मेरे हाथ का रापटा

सॉफ्ट ड्रिंक में थम्स अप और डेस्सेर्ट में कोन बटर स्कॉच
खा कर इतना खुश मत हो, तू अपनी होने वाली बुरी हालत के बारे में सोच

फ्री की सौंफ शक्कर हजम नहीं हुई जो मुखवास में चबाया  है पान
मुझसे मिलने से पहले अब याद कर लेना तू अपने सारे  भगवान्

पता है मुझे कि बहुत मजे ले ले कर तुने अंगुलियाँ है चाटी
ऐसा हश्र करुँगी कि भूल जायेगा मेरे बिना अब कोई भी पार्टी

डेली सोप की वेम्प की तरह जल रही है मुझमे बदले की आग
बिना पार्टी लिए छोड़ूंगी  नहीं तुझे चाहे कितना भी तू मुझसे भाग

अब तो हर जगह होंगे "नवीन द ग्रेट चालबाज" के चर्चे
क्योकि हर गली मोहल्ले में लगवाउंगी तेरे पोस्टर और पर्चे 


अब चुपचाप मान ले गलती अपनी वरना मैं भी अपने तेवर दिखाउंगी
तेरी चालाकी के किस्से तेरी आने वाली सात पीढ़ियों को सुनाउंगी


3 October, 2010 का दिन (D day of party ) तुझे बुरे सपने की तरह याद आये
मुझे कैसे पता चला इस में दिमाग मत लगा क्योकि घर का भेदी (श्रीमान मयंक गुप्ता ) ही लंका ढहाये



कमबख्त मोहब्बत हो गई ...

इक अजनबी से गुफ़्तगू नज़रों  की इनायत हो गई ...
दोस्ती का था इरादा कमबख्त मोहब्बत हो गई ...

बातों  ही बातों में ये क्या शरारत हो गयी ......
उन्होंने चूमा लबों  से और क़यामत हो गयी ....

नज़रों  से हुई नज़रें चार और चाहत हो गई .....
हमारी ज़िन्दगी अब तो उन्ही की अमानत हो गई ....

पिघलने लगे उनकी साँसों की गर्मी में इस तरह से ....
उनके आगोश में सिमटे तो इश्क़  की नीयत हो गई ....

हमारी ख़ामोशी ने बयाँ किया हाल-ए-दिल हमारा ....
ज़माने को तो हमारी ख़ामोशी से शिकायत हो गई .....

उनका दीदार किया तो आज खुदा की इबादत हो गई .....
उनका हर लफ्ज़ हमारे लिए कुरान  की आयत हो गई ......

लैला-मजनू, हीर-राँझा की तरह इश्क़ की नयी इबारत हो गई .....
अब तो हमें हर लम्हे में उनकी जरुरत हो गई .....

दुआ में माँगा करते थे रोज़ उन्हें हम .....
सामने पाकर उन्हें मेरे सपनों  की दुनिया हकीकत हो गई ....

मेरी रूह, मेरे रोम-रोम पर उनकी मिलकियत हो गई .....
यहाँ सब कहते है की दीवानों की सी मेरी हालत हो गयी .....

तूफ़ान में बुझ रही थी दिये  की "वर्तिका"
मिला साथ उनका तो ज़िन्दगी बेशकीमत हो गई ......

जादू है तेरा ही जादू ......

रूठा हुआ मेरा यार बहुत ख़ूबसूरत नज़र आया ......
क़यामत तो तब हुई जब आसमां की और देखा
चाँद भी उन्ही का हमशक्ल नज़र आया ....

बैठी हु किताब खोलकर तो खो गयी कहीं ...
क्या जादू है की हर पन्ने पर अक्स उन्ही का नज़र आया .....

सावन की बरसात ने आज मुझे भी मदहोश कर दिया .....
बारिश की बूंदों में उनकी मौजूदगी का असर नज़र आया .....

तकदीर पर होने लगा गुमां जब बहारों को देखा.....
फूलों में मुस्काता हुआ बस वो ही नज़र आया .....

दुआ मांगी है खुदा से जब खुशियों की मेरी .....
उन दुआओं  में भी नाम उन्ही का नज़र आया .....

अज़नबी लोगो को देखकर मुस्कुराने लगी मैं ....
यार मेरा मुझे हर चेहरे में नज़र आया .....

सामने है अब मेरे तो नज़रे उठती ही नहीं....
शर्म और हया का जाने क्यों पर्दा नज़र आया...

इस बाँवरे मन को अब खुद पर नही है यकीन......
लगा जैसे इस बार भी खुली आँखों से सपना कोई नज़र आया ...


वो प्यार मुझे लौटा दो.....................

उनकी खामोशियों ने हमेशा हमें सदा दी..
हमने उन्ही का दिल तोडा जिन्होंने हमें पनाह दी...........

अब हालात बहाते है हमारी हालत पर आंसू ..
उनसे ही कर बैठे बेवफाई जिन्होंने हमें सच्ची वफ़ा दी........

उन्होंने तो हमें अपनी सिर  आँखों पर बिठाया ..
और हमने अपनी ज़िन्दगी से उनकी हस्ती मिटा दी.......

हमारी राहों को उन्होंने फूलों से गुलज़ार बना दिया ..
हमने तो उनके लिए कांटो की सेज़ सजा दी .....

कहते है प्यार खुद को खोकर सब कुछ पाने का नाम है ..
अरे हम तो खो बैठे उन्हें ही जिन्होंने हमें अपने मन में जगह दी ......

जब हम भटक रहे थे दर बदर प्यासे हिरन की तरह ..
वो ही एक शख्स थे जिन्होंने हमें प्यार की बरखा दी .....

हमने तो अपनी ख़ुशी के लिए उनके प्यार की सौदेबाजी कर डाली ..
और एक वो थे जिन्होंने हमारी एक मुस्कान के लिए अपनी सारी खुशिया लुटा दी .....

उन्होंने तो अपने छोटे छोटे सपनो में हमें भागीदार बनाया ..
हमने ही अपने आपको तड़प तड़प कर जीने की वजह दी .....

हमें तो आदत हो गयी थी हर बाज़ी जीतने की ..
क्या पता था की उन्होंने ही हमारी हर बाज़ी को जीत की दिशा दी ....

आज उनको खोकर उनकी अहमियत समझ आई है ...
सब कुछ जीतकर हार गए उन्हें, रह गए है अकेले,
तड़पते हुए , चाहते है उनका साथ कुछ पल के लिए ...
पर शायद इसी तरह खुदा ने हमें हमारे गुनाहों की सजा दी .....