Wednesday, August 31, 2011

.........चाँद बनाम चाँद........

पूनम का चाँद आज मगरूर हो गया
उसे अपनी चांदनी पर गुरूर हो गया
हंसकर बोला : ऐ नासमझ बन्दे............
"तू क्यूँ ईद के चाँद का शुक्रगुज़ार हो रहा है
उसके लिए महीने भर से रोज़ेदार हो रहा है
बादलो में छुपी उस लकीर का तू ताबेदार हो रहा है
अरे एक बार नज़र उठाकर तो देख ज़रा
मेरी चांदनी से सराबोर ये सारा संसार हो रहा है

वो चाँद की नादानी पर हँस पड़ा और बोला..........
"बेशक तुम्हारी चमक से आफताब ये संसार हो रहा है
पर ईद के चाँद से तो खिज़ा में भी बहार हो रहा है
हर और बस प्यार अमन और करार हो रहा है
इसीलिए तो ये दिल भी सजदे को बेकरार हो रहा है
हमें उस खुदा की शख्सियत पर ऐतबार हो रहा है
ये छोटी सी लकीर भी मेरे लिए नायाब उपहार हो रहा है
तेरे जैसा रोशन नहीं तो भी बड़ी शिद्दत से इंतज़ार हो रहा है
क्योंकि तू तो नज़र आ जाता है हर महीने ही पर
उसका दीदार तो साल में एक बार हो रहा है "

ईद मुबारक

Tuesday, August 30, 2011

माँ तो माँ होती है ........


मुश्किल में मुझे धीरज देती है माँ,
मुझे रोता देख खुद रो देती है माँ...........

कभी काम में इतनी मगन की मुझे भी भूल जाती है माँ,
कभी इतनी सजग कि मन कि बात जान लेती है माँ...........

सुबह से शाम तक काम में लगी रहती है मेरी माँ,
सूरज की चादर उठाती चाँद को भी लोरी गाकर सुलाती है मेरी माँ........

कभी हमें मार कर, डांट कर समझाती है माँ,
कभी हमारे लिए पापा से भी लड़ जाती है माँ.......

"बस इससे ज्यादा नही मिलेगा" ऐसा कहकर गुस्सा दिखाती है माँ,
फिर चुपके से अपना हिस्सा देकर खुश हो जाती है माँ.........

कभी खुद हो जाये बीमार तो दवा लेना भी भूल जाती है माँ,
हमें जो आये एक छींक तो सारी रात आँखों में बिताती है माँ...........

हमारी हर छोटी बड़ी इच्छा को पूरा करने का जतन करती है माँ,
और उसके लिए अपनी ख्वाहिशों का भी दमन करती है माँ.........

हमारे सपनों में अपने सपने सजाती है माँ,
और उन्हें पूरा करने में अपनी उम्र बिताती है माँ........

Wednesday, August 17, 2011

ये आपकी मौज़ूदगी का असर है..........

आपने चूमा हमें लबों से,
और हम खिलकर कमल हो गए॥

हम तो थे एक अनकही दास्तान,
आपने पढ़ा और हम मशहूर ग़ज़ल हो गए॥

जिनकी ख्वाहिश हम सपनों में करते थे,
साथ आपके वो सब लम्हें असल हो गए॥

जिंदगी थी हमारी तपते रेगिस्तान सी,
आपके प्यार की बारिश में हम शीतल हो गए॥

काँटों भरे पथरीले रास्ते थे किस्मत में हमारी,
आप बने हमसफ़र तो वो रास्ते भी मखमल हो गए॥

सभी ने छोड़ दिया था बीच मझधार में हमारा साथ,
आपने थामा जो हाथ तो चाँद पर हमारे कदम हो गए॥

बहारो में भी जो पतझड़ नज़र आते थे,
आपकी खुशबू से महके तो वो बाग़ भी अब चमन हो गए॥

भोर की पहली किरण बनकर जो छुआ आपने,
दिल के हर एक कोने रोशन हो गए॥

हर बाजी जीतने का शगल रखते थे,
आज खुद को आपसे हारकर भी हम सफल हो गए॥

ये ज़माना तो कहता था पत्थर हमें,
आपने हमें तराशा और हम ताजमहल हो गए॥

Wednesday, August 10, 2011

मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन..........

बारिश में जो भीगी तो मुझको बचपन की यादें आ गई....
मिटटी की सौंधी सी खुशबू मन का कोना-कोना महका गई॥

देखा आज कुछ बच्चों को कागज़ की नाव बनाते हुए....
नाम लिखकर अपना मैं भी उसे कुछ दूर बहाकर आ गई॥

बड़े दिनों बाद आसमान में आज इन्द्रधनुष निकला हैं....
जाकर छत पर उसको छूने की कोशिश करके आ गई॥

फूलों वाला छाता लेकर इठलाती हुई स्कूल जाती थी....
उसी छाते को ओढ़कर मैं नुक्कड़ तक जाकर आ गई॥

याद आ गया दोस्तों के संग गीली मिट्टी में घरौंदे बनाना....
पीपल की छाँव तले एक घर अपना भी बनाकर आ गई॥

जमा हो गया है सड़क पर आज फिर से ढेर सा पानी....
उस पानी में उछल उछल सब कपड़े भिगो कर आ गई॥

खेलते हुए कीचड़ में सन गए सब हाथ पैर मेरे....
देखकर उनको दादी की फटकार मुझे याद आ गई॥

ठंडी-ठंडी हवा से तन में सिहरन सी उठने लगी....
चाय की चुस्की और गरम पकौड़े की तलब मन में जगा गई॥

उमड़-घुमड़ कर गरजे बादल और चमकी है ज़ोरों से बिजलियाँ....
डरकर छुपने को माँ का आँचल ढूंढने को आ गई॥

आसमान की बारिश वो अब आँखों से बरसने लगी है...
लगता हैं वो सारी यादें आंसुओं में सिमटकर आ गई॥


Tuesday, August 9, 2011

इस नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी हैं.......

मेरी एक आवाज़ पर दौड़े चले आते थे.......
आज कितना पुकारा आपको मैंने, पापा आप क्यूँ नहीं आते???

मेरी एक सिसकी से परेशान हो जाते थे,
अब रात भर रोने पर भी मुझे चुप क्यूँ नहीं कराते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते..........

मेरे हंसने पर हँसते, मुस्कुराने पर मुस्काते थे,
आज बैठी हूँ उदास कोई मजेदार किस्सा क्यूँ नहीं सुनाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते.........

बच्चो संग बच्चे बन जाते, इतना प्यार लुटाते थे,
अब अपनी छोटी-छोटी चुटकियों से सबका मन क्यूँ नहीं गुदगुदाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते..........

बहुत याद आता है हर मौके पर आपका गाने सुनाना,
सूनी है महफ़िल कोई प्यारा सा नगमा क्यूँ नहीं गुनगुनाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते.........

गलतियों पर होते थे गुस्सा, अपनी नाराज़गी जताते थे,
पग-पग पर करती हूँ खता, अब आप मुझे क्यूँ नहीं समझाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते.........

जब भी होती थी धूप कड़ी, साया आप बन जाते थे,
चुभ रहे है कांटे कई पैरों में, अब राहों में फूल क्यूँ नहीं बिछाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते..........

पास बैठकर आपके करना चाहती हूँ मैं भी ढेर सी बातें,
तरस गयी हूँ आपकी आवाज़ सुनने को, मुझे अपने पास क्यूँ नहीं बुलाते???
पापा आप क्यूँ नहीं आते........

Please PAPA ek baar wapas aa jao...
Happy B'day Papa...
missing you... :(










Thursday, August 4, 2011

वो खुश रहे हमेशा.......

आज हर महफ़िल में एक मंज़र नजर आता है...

जिसकी आवाज़ मीलों तक सुनाई देती थी,
खामोश वो समंदर नज़र आता है॥

सोचा था प्यार करके पा लेंगे खुशियाँ सारी,
पर ये प्यार ही तो सबसे खुदगर्ज़ नज़र आता है॥

जिसकी खातिर तोड़ दिया सारी दुनिया से नाता,
वो तो अब अपनी दुनिया में अलमस्त नज़र आता है॥

सुना था की खुदा सभी गमज़दो की फ़रियाद सुनता है,
पता नहीं क्यों वो भी मुझसे बेखबर नज़र आता है॥

देखा आज मैंने उसे किसी और का हाथ थामे,
जलाकर मुझे वो बेहद खुश नज़र आता है॥

अगर ये ही तरीका है उसे खुश देखने का,
तो चिता की ज्वाला में भी अब सुकून नज़र आता है..

Wednesday, August 3, 2011

my papa my life

कैसे चलूंगी मैं उनके बिना ...
अंगुली पकड़ कर चलना तो पापा ने ही मुझे सिखाया है |

खुश होते थे मेरे डगमगाते कदम देखकर ...
सारा - सारा दिन गोद में पापा ने ही मुझे खिलाया है |

नहीं रखने दिए पैर कभी जमीन पर ...
हमेशा अपनी बांहों में पापा ने ही मुझे झुलाया है |

पूरी होती थी हर ख्वाहिश मेरी हमेशा ...
अपने सर आँखों पर पापा ने ही मुझे बिठाया है |

मम्मी की डांट से जब आँखों में आंसू होते थे ...
प्यार से पुचकार कर पापा ने ही चुप कराया है |

देख नहीं सकते मेरे चेहरे पर उदासी वो...
अपने सब काम छोड़ कर पापा ने ही मुझे मनाया है |

मेरे सपनो में संजोये उन्होंने अपने सपने ...
इतने ऊँचे मुकाम तक पापा ने ही मुझे पहुँचाया है |

अपना दर्द कभी बताया नहीं मुझको ...
मेरे जख्मो पर मरहम पापा ने ही लगाया है |

डर लगता था मुझे भी बहुत इन अंधेरो से ...
उजाले का दीप मन में मेरे , पापा ने ही जलाया है |

घबराती थी मैं छोटी - छोटी मुश्किलों से ...
हिम्मत का पाठ ज़िन्दगी में पापा ने ही पढाया है |

चाहे कितने भी बड़े बनो गर्व ना कभी खुद पर करो ...
गम में भी हस्ते रहना, पापा ने ही मुझे सिखाया है |

आपकी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए ...
~~ आपकी वर्तु ~~