थक जाते है बहुत काम करते करते,
माँ तू होती तो एक कप चाय बनाने को कह देते |
अब नहीं सुहाता स्वाद इन पकवानों का,
माँ तू होती तो तेरे हाथो से लजीज दाल रोटी खा लेते |
नरम बिस्तरों पर भी नींद नही आती अब तो,
माँ तू होती तो लोरी सुनते सुनते तेरी गोद में सिर रखकर सो लेते |
कड़ी धूप हो या बारिश कोई परवाह करने वाला नहीं,
माँ तू होती तो तेरी ममता की छाँव में हर मौसम सह लेते |
इन रेशमी कपड़ो में वो अपनेपन का एहसास कहाँ,
माँ तू होती तो हाथो से बुना स्वेटर पहन इठलाकर चल देते |
करवटे बदलते हुए जाने कब रात कट जाती है,
माँ तू होती तो तेरे किस्से कहानियो में अपना बचपन संजो लेते |
झूठी हंसी हंसकर अपना गम छुपाने की कोशिश करते है,
माँ तू होती तो तेरे आँचल में सिर छुपाकर थोडा रो लेते |
दुनिया की भाग दौड़ में जीने तक की फुर्सत नहीं मिली,
माँ तू होती तो तेरे कदमो तले घडी भर चैन से जी लेते |
खुशियों की तलाश में बहुत आगे निकल गए,
माँ तू होती तो तेरे प्यार के सागर से दो बूंद हम भी पी लेते|
dis poem is not originally written by me. I have made some modifications only.
