रूठा हुआ मेरा यार बहुत ख़ूबसूरत नज़र आया ......
क़यामत तो तब हुई जब आसमां की और देखा
चाँद भी उन्ही का हमशक्ल नज़र आया ....
बैठी हु किताब खोलकर तो खो गयी कहीं ...
क्या जादू है की हर पन्ने पर अक्स उन्ही का नज़र आया .....
सावन की बरसात ने आज मुझे भी मदहोश कर दिया .....
बारिश की बूंदों में उनकी मौजूदगी का असर नज़र आया .....
तकदीर पर होने लगा गुमां जब बहारों को देखा.....
फूलों में मुस्काता हुआ बस वो ही नज़र आया .....
दुआ मांगी है खुदा से जब खुशियों की मेरी .....
उन दुआओं में भी नाम उन्ही का नज़र आया .....
अज़नबी लोगो को देखकर मुस्कुराने लगी मैं ....
यार मेरा मुझे हर चेहरे में नज़र आया .....
सामने है अब मेरे तो नज़रे उठती ही नहीं....
शर्म और हया का जाने क्यों पर्दा नज़र आया...
इस बाँवरे मन को अब खुद पर नही है यकीन......
शर्म और हया का जाने क्यों पर्दा नज़र आया...
इस बाँवरे मन को अब खुद पर नही है यकीन......
लगा जैसे इस बार भी खुली आँखों से सपना कोई नज़र आया ...
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