आज हर महफ़िल में एक मंज़र नजर आता है...
जिसकी आवाज़ मीलों तक सुनाई देती थी,
खामोश वो समंदर नज़र आता है॥
सोचा था प्यार करके पा लेंगे खुशियाँ सारी,
पर ये प्यार ही तो सबसे खुदगर्ज़ नज़र आता है॥
जिसकी खातिर तोड़ दिया सारी दुनिया से नाता,
वो तो अब अपनी दुनिया में अलमस्त नज़र आता है॥
सुना था की खुदा सभी गमज़दो की फ़रियाद सुनता है,
पता नहीं क्यों वो भी मुझसे बेखबर नज़र आता है॥
देखा आज मैंने उसे किसी और का हाथ थामे,
जलाकर मुझे वो बेहद खुश नज़र आता है॥
अगर ये ही तरीका है उसे खुश देखने का,
तो चिता की ज्वाला में भी अब सुकून नज़र आता है..
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