कैसे चलूंगी मैं उनके बिना ...
अंगुली पकड़ कर चलना तो पापा ने ही मुझे सिखाया है |
खुश होते थे मेरे डगमगाते कदम देखकर ...
सारा - सारा दिन गोद में पापा ने ही मुझे खिलाया है |
नहीं रखने दिए पैर कभी जमीन पर ...
हमेशा अपनी बांहों में पापा ने ही मुझे झुलाया है |
पूरी होती थी हर ख्वाहिश मेरी हमेशा ...
अपने सर आँखों पर पापा ने ही मुझे बिठाया है |
मम्मी की डांट से जब आँखों में आंसू होते थे ...
प्यार से पुचकार कर पापा ने ही चुप कराया है |
देख नहीं सकते मेरे चेहरे पर उदासी वो...
अपने सब काम छोड़ कर पापा ने ही मुझे मनाया है |
मेरे सपनो में संजोये उन्होंने अपने सपने ...
इतने ऊँचे मुकाम तक पापा ने ही मुझे पहुँचाया है |
अपना दर्द कभी बताया नहीं मुझको ...
मेरे जख्मो पर मरहम पापा ने ही लगाया है |
डर लगता था मुझे भी बहुत इन अंधेरो से ...
उजाले का दीप मन में मेरे , पापा ने ही जलाया है |
घबराती थी मैं छोटी - छोटी मुश्किलों से ...
हिम्मत का पाठ ज़िन्दगी में पापा ने ही पढाया है |
चाहे कितने भी बड़े बनो गर्व ना कभी खुद पर करो ...
गम में भी हस्ते रहना, पापा ने ही मुझे सिखाया है |
आपकी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए ...
~~ आपकी वर्तु ~~
अंगुली पकड़ कर चलना तो पापा ने ही मुझे सिखाया है |
खुश होते थे मेरे डगमगाते कदम देखकर ...
सारा - सारा दिन गोद में पापा ने ही मुझे खिलाया है |
नहीं रखने दिए पैर कभी जमीन पर ...
हमेशा अपनी बांहों में पापा ने ही मुझे झुलाया है |
पूरी होती थी हर ख्वाहिश मेरी हमेशा ...
अपने सर आँखों पर पापा ने ही मुझे बिठाया है |
मम्मी की डांट से जब आँखों में आंसू होते थे ...
प्यार से पुचकार कर पापा ने ही चुप कराया है |
देख नहीं सकते मेरे चेहरे पर उदासी वो...
अपने सब काम छोड़ कर पापा ने ही मुझे मनाया है |
मेरे सपनो में संजोये उन्होंने अपने सपने ...
इतने ऊँचे मुकाम तक पापा ने ही मुझे पहुँचाया है |
अपना दर्द कभी बताया नहीं मुझको ...
मेरे जख्मो पर मरहम पापा ने ही लगाया है |
डर लगता था मुझे भी बहुत इन अंधेरो से ...
उजाले का दीप मन में मेरे , पापा ने ही जलाया है |
घबराती थी मैं छोटी - छोटी मुश्किलों से ...
हिम्मत का पाठ ज़िन्दगी में पापा ने ही पढाया है |
चाहे कितने भी बड़े बनो गर्व ना कभी खुद पर करो ...
गम में भी हस्ते रहना, पापा ने ही मुझे सिखाया है |
आपकी प्रेरणा को आत्मसात करते हुए ...
~~ आपकी वर्तु ~~
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