मुश्किल में मुझे धीरज देती है माँ,
मुझे रोता देख खुद रो देती है माँ...........
कभी काम में इतनी मगन की मुझे भी भूल जाती है माँ,
कभी इतनी सजग कि मन कि बात जान लेती है माँ...........
सुबह से शाम तक काम में लगी रहती है मेरी माँ,
सूरज की चादर उठाती चाँद को भी लोरी गाकर सुलाती है मेरी माँ........
कभी हमें मार कर, डांट कर समझाती है माँ,
कभी हमारे लिए पापा से भी लड़ जाती है माँ.......
"बस इससे ज्यादा नही मिलेगा" ऐसा कहकर गुस्सा दिखाती है माँ,
फिर चुपके से अपना हिस्सा देकर खुश हो जाती है माँ.........
कभी खुद हो जाये बीमार तो दवा लेना भी भूल जाती है माँ,
हमें जो आये एक छींक तो सारी रात आँखों में बिताती है माँ...........
हमारी हर छोटी बड़ी इच्छा को पूरा करने का जतन करती है माँ,
और उसके लिए अपनी ख्वाहिशों का भी दमन करती है माँ.........
हमारे सपनों में अपने सपने सजाती है माँ,
और उन्हें पूरा करने में अपनी उम्र बिताती है माँ........
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