Wednesday, August 31, 2011

.........चाँद बनाम चाँद........

पूनम का चाँद आज मगरूर हो गया
उसे अपनी चांदनी पर गुरूर हो गया
हंसकर बोला : ऐ नासमझ बन्दे............
"तू क्यूँ ईद के चाँद का शुक्रगुज़ार हो रहा है
उसके लिए महीने भर से रोज़ेदार हो रहा है
बादलो में छुपी उस लकीर का तू ताबेदार हो रहा है
अरे एक बार नज़र उठाकर तो देख ज़रा
मेरी चांदनी से सराबोर ये सारा संसार हो रहा है

वो चाँद की नादानी पर हँस पड़ा और बोला..........
"बेशक तुम्हारी चमक से आफताब ये संसार हो रहा है
पर ईद के चाँद से तो खिज़ा में भी बहार हो रहा है
हर और बस प्यार अमन और करार हो रहा है
इसीलिए तो ये दिल भी सजदे को बेकरार हो रहा है
हमें उस खुदा की शख्सियत पर ऐतबार हो रहा है
ये छोटी सी लकीर भी मेरे लिए नायाब उपहार हो रहा है
तेरे जैसा रोशन नहीं तो भी बड़ी शिद्दत से इंतज़ार हो रहा है
क्योंकि तू तो नज़र आ जाता है हर महीने ही पर
उसका दीदार तो साल में एक बार हो रहा है "

ईद मुबारक

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