जाने क्यों ये अपने मुझसे रूठ जाते है...
पिरोती हूँ माला पर मोती टूट जाते है..
जाने क्यों...
साए की तरह रहते थे हरदम हमारे पास..
वो हमसाया बनकर भी हमसे दूर जाते है..
जाने क्यों...
जो जिन्दगी भर साथ निभाने का वादा करते थे...
वो अब यादो में भी नजर आने से कतराते है...
जाने क्यों...
जिनके अपनेपन ने हमें जिंदगी की कीमत सिखाई..
वो अब बेगाने बनकर हमारी खुशियाँ लूट जाते है..
जाने क्यों....
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