Wednesday, June 11, 2014

अब मैंने जीना सीख लिया है....

अब मैंने जीना सीख लिया है...

खोया हुआ तो हमेशा मिलता था..
अब मैंने पाकर खोना सीख लिया है...

हँसते हुए कई बार आँखों में पानी आता था..
अब मैंने भरी आँखों में मुस्कुराना सीख लिया है...

छोटी सी चोट से दिल ज़ार ज़ार हो जाता था..
मैंने हंसी में दर्द को पीना सिख लिया है...

महफिलो का सब करते है इंतज़ार शिद्दत से..
पर मैंने सूनेपन को अपनाना सीख लिया है....

पहले आपकी बाते करते जुबाँ नहीं थकती थी..
अब ज़िक्र होने पर भी मैंने जुबाँ को सीना सीख लिया है...

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