जब दूर थे हम तो वो हमारी तस्वीरों से बात किया करते थे
हमारे करीब होने का एहसास किया करते थे.…
आज हमारी और देखने की फुर्सत नहीं उन्हें
कभी हमारी सिर्फ़ एक झलक पाने की फ़रियाद किया करते थे.…
हमारी मौजूदगी अब उन्हें गंवारा है..
अब उनका साहिल कहीं और हमारा किनारा कहीं है..
पहले तो कहते थे की अपना हमसफ़र हमें वो..
आज हमसे भी ज्यादा उन्हें प्यारा कोई है..
हम तो उनके इंतज़ार में पलके बिछाये बैठे थे..
अपनी आँखों में उनकी चाहत के सपने सजाये बैठे थे...
सोचा नही था हमने वो निकलेंगे ऐसे बेवफ़ा...
हमारी अरमानों की चिता ऊपर नई महफ़िल जमाये बैठे थे...
अरमानों को भुला दिया और सपनों से मुँह मोड़ लिया
उनकी ख़ुशी के खातिर हमने उनसे रिश्ता तोड़ लिया
बस एक ही सवाल करता है मन ये मेरा मुझसे ...
मुझे क्यों तनहा यूँ बीच राह में छोड़ दिया…
हमारे करीब होने का एहसास किया करते थे.…
आज हमारी और देखने की फुर्सत नहीं उन्हें
कभी हमारी सिर्फ़ एक झलक पाने की फ़रियाद किया करते थे.…
हमारी मौजूदगी अब उन्हें गंवारा है..
अब उनका साहिल कहीं और हमारा किनारा कहीं है..
पहले तो कहते थे की अपना हमसफ़र हमें वो..
आज हमसे भी ज्यादा उन्हें प्यारा कोई है..
हम तो उनके इंतज़ार में पलके बिछाये बैठे थे..
अपनी आँखों में उनकी चाहत के सपने सजाये बैठे थे...
सोचा नही था हमने वो निकलेंगे ऐसे बेवफ़ा...
हमारी अरमानों की चिता ऊपर नई महफ़िल जमाये बैठे थे...
अरमानों को भुला दिया और सपनों से मुँह मोड़ लिया
उनकी ख़ुशी के खातिर हमने उनसे रिश्ता तोड़ लिया
बस एक ही सवाल करता है मन ये मेरा मुझसे ...
मुझे क्यों तनहा यूँ बीच राह में छोड़ दिया…
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