जब से मिली है मेरी नज़र से उनकी नज़र...
ना शामो का ठिकाना है ना रातो की है खबर..
ना शामो का ठिकाना है ना रातो की है खबर..
जब भी खोलते है लब आ जाता है उनका ज़िकर..
ना खुद का होश है ना ज़माने की है फ़िकर..
ना खुद का होश है ना ज़माने की है फ़िकर..
मुझ पर है उनकी चाहत का कुछ ऐसा ये असर...
उनके साथ से मेरी शब है उनके साथ ही सेहर...
उनके साथ से मेरी शब है उनके साथ ही सेहर...
चाहते है दिल की गहराइयों से उनको मगर...
खो ना दे पाकर उनको इसी बात का है डर...
खो ना दे पाकर उनको इसी बात का है डर...
उनसे हो मंजिल मेरी उनसे ही हो सफ़र...
हर जनम में मिले मुझे बस वो ही हमसफ़र...
हर जनम में मिले मुझे बस वो ही हमसफ़र...
दुआ है खुदा से ना दिखाए कभी जुदाई का मंजर...
हो जाये अटूट ये रिश्ता कर दे कुछ ऐसी मेहर...
हो जाये अटूट ये रिश्ता कर दे कुछ ऐसी मेहर...
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