Friday, June 13, 2014

मेरी माँ... प्यारी माँ...

"जब जब मैंने खुद को किसी परेशानी में पाया है
तब तब माँ ने ही मेरा साथ निभायाहै।

कभी एक गुरु कभी एक दोस्त
तो कभी माँ मेरा साया है।

आज जब इश्वर को याद करके आँखे बंद की तो
माँ का चेहरा ही नज़रों के सामने पाया है। 

माँ के इतने रूप देखकर
 एक विचार मन में आया है।

नही जा सकता भगवान् हर किसी के पास
इसीलिए तो उसने माँ को बनाया है। 

है चारों धामों कि पवित्रता माँ के चरणों मे क्योंकि
माँ के जरिये ही इश्वर ने अपने होने का एहसास कराया है। 

माँ को ठुकरा कर दौलत के पीछे मत भागो
माँ के आँचल में तो अनमोल खजाना समाया है।

माँ कि आँखों में आंसू देने वाले इतना जरुर सोचना
तुने खुद ब खुद स्वर्ग का मार्ग ठुकराया है। 

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