खोकर आपको जाना कि आप कितने ख़ास थे..
महफूज़ थी मैं जब आप मेरे आस पास थे..
ऊँचाइयो को छूने का हौसला था मन में..
मेरे मन का तो आप ही आत्मविश्वास थे..
सुलझ जाती थी हर मुश्किल मेरी..
उसमे भी छिपे आप ही के प्रयास थे..
महसूस किया है मैंने अकेले उड़ने का दर्द..
मेरे नन्हे पंखो की आप ही परवाज़ थे..
अन्धकार क्या होता है अब जाना है मैंने..
मेरे लिए तो आप तारों भरा आकाश थे..
खामोश सी लगती है जिंदगी अब मेरी..
आप तो मेरे अंतर की छुपी हुई आवाज़ थे..
बेजान सी जी रही हूँ जिंदगी आपके बिना..
आप ही मेरा दिल.. मेरी धड़कन.. मेरी श्वास थे..
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